केंद्र सरकार ने दी चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी: वी नारायणन

नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-5 मिशन’ को मंजूरी दे दी है. इस मिशन के तहत, चंद्रमा की सतह का अध्ययन करने के लिए 250 किलोग्राम का रोवर भेजा जाएगा. ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने इस खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि यह मिशन जापान के सहयोग से संचालित किया जाएगा. रविवार को एक सम्मान समारोह में बोलते हुए ISRO प्रमुख ने कहा कि ‘चंद्रयान-5’ को हाल ही में हरी झंडी मिली है.

उन्होंने बताया कि इससे पहले ‘चंद्रयान-3’ मिशन के तहत 25 किलोग्राम का रोवर ‘प्रज्ञान’ चंद्रमा पर भेजा गया था, जो सफलतापूर्वक लैंड हुआ था. इस बार चंद्रयान-5 में अधिक क्षमता वाला रोवर भेजा जाएगा, जिससे चंद्रमा की सतह पर और गहराई से अध्ययन किया जा सकेगा

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‘चंद्रयान-4’ मिशन पर काम जारी

बता दें, ISRO ने चंद्रयान-3 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था, जिसमें लैंडर ‘विक्रम’ ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ की थी. यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा.

इससे पहले, ISRO ‘चंद्रयान-4’ मिशन पर भी काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा से मिट्टी और चट्टानों के नमूने लाना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे 2027 में लॉन्च किया जा सकता है.

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 ‘चंद्रयान-5 मिशन’ का मकसद?

चंद्रयान मिशनों का मकसद चंद्रमा की सतह और वहां मौजूद खनिजों का अध्ययन करना है. इसरो के वैज्ञानिक लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं और भारत को स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं.

चंद्रयान-5 मिशन के ऐलान के बाद देशभर में वैज्ञानिक समुदाय में उत्साह है, और अब सभी की नजरें इस नए मिशन पर टिकी हैं.

जापान के साथ मिलकर चंद्रयान-5 मिशन को अंजाम देगा इसरो
नारायणन ने कहा, 'अभी तीन दिन पहले ही हमें चंद्रयान-5 मिशन के लिए मंजूरी मिली है। हम इसे जापान के साथ मिलकर करेंगे।' चंद्रयान-4 मिशन के 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा से एकत्र किए गए नमूने लाना है। इसरो की भविष्य की परियोजनाओं के बारे में नारायणन ने कहा कि गगनयान सहित विभिन्न मिशनों के अलावा, भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की योजनाएं चल रही हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने हाल ही में अपने अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग – स्पैडेक्स की सफल अनडॉकिंग करने में भी सफलता हासिल की। इससे चंद्रयान-4 और अन्य भविष्य के मिशनों के लिए मंच तैयार हो गया। 

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